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संस्कृत शोध संस्थान
श्री मध्यभारत हिंदी साहित्य समिति

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आयोजन

 

 

राज्य-स्तरीय संस्कृत शिक्षक प्रशिक्षण-कार्यशाला 2008
दिनांक 08 सितंबर 2008 से 13 सितंबर 2008 तक
 
 
 

कार्यशाला का प्रतिवेदन

शैक्षिक अभ्युत्थान योजनांतर्गत म.प्र. के समस्त शासकीय हाईस्कूल/हायर सेकेंडरी विद्यालयों में कार्यरत विषय शिक्षकों को नवीन पाठ्य की कठिन अवधारणाओं को सरल बनाने तथा उन्हें अकादमिक रूप से सुधार लाने के उद्देश्य से एक राज्य स्तरीय संस्कृत शिक्षक प्रशिक्षण कार्यशाला का षड् दिवसीय आयोजन दिनांक 08 सितंबर से 13 सितंबर'08 तक संस्कृत शोध संस्थान, श्री मध्यभारत हिंदी साहित्य में किया गया । जिसमें संस्कृत भाषा को संस्कृत माध्यम से व रोचक विधियों से पढ़ाने की शिक्षण विधियों पर प्रदेश के स्त्रोत शिक्षकों व विषय विशेषज्ञों द्वारा पाठ प्रदर्शन देने के साथ ही अध्यापन किया गया ।

उक्त प्रशिक्षण लोक शिक्षण संचालनालय स्कूल शिक्षा विभाग म.प्र., संस्कृत शोध संस्थान श्री म.भा. हिंदी साहित्य समिति एवं शासकीय संस्कृत महाविद्यालय, इन्दौर के सयुक्त तत्वावधान में आयोजित किया गया । प्रशिक्षण में संपूर्ण प्रदेश के समस्त जिलों से प्रायशः दो- दो ऐसे संस्कृत शिक्षकों ने प्रशिक्षण प्राप्त किया,जो यहाँ से प्रशिक्षण प्राप्त करने के बाद अपने अपने जिले के संस्कृत शिक्षक-व्याख्याताओं को प्रशिक्षित करेंगे ।

कार्यशाला का शुभारंभ 8 सितंबर को डॉ. श्रीकृष्ण शर्मा, अतिरिक्त संचालक, संभाग इन्दौर उच्च शिक्षा की अध्यक्षता में हुआ । उन्होंने कहा कि संस्कृत ही एकमात्र ऐसी भाषा है जो भारतीय संस्कृति को एक करके अच्छे नागरिकों का निर्माण करती है । कार्यक्रम का मुख्य आतिथ्य करते हुए श्री विशद तिवारी, डिवीजनल कमांडेंट संभाग इंदौर ने अपने उद्बोधन में प्रशिक्षणार्थियों से अपेक्षा की कि वे संस्कृत माध्यम से भारतीय संस्कृति की पुनर्जागरण का शंखनाद करें । कार्यक्रम की विशिष्ट आतिथि थीं डॉ. चंद्रकिरण अग्निहोत्री, प्राचार्य संस्कृत महाविद्यालय, इन्दौर । कार्यक्रम के प्रमुख वक्ता एवं प्रशिक्षण के प्रमुख स्त्रोत शिक्षक डॉ. विनायक पांडेय ने कहा कि भारत देश को सांस्कृतिक संक्रमण से मुक्त कराने के लिए संस्कृत भाषा को राष्ट्रभाषा के रूप में प्रतिष्ठित किया जाना चाहिए ।

कार्यशाला का शुभारंभ पंजीयन के पश्चात् मंचीय कार्यक्रम से हुआ । वैदिक मंगलाचरण से मंत्रपूत सभागृह में दीप प्रज्जवलन से कार्यक्रम का आरंभ हुआ । सरस्वती वंदना कु. भाग्यश्री देशमानकर ने की । स्वागत भाषण संस्कृत शोध संस्थान के निदेशक श्री बसंतसिंह जौहरी ने दिया तथा आभार प्रदर्शन किया कार्यक्रम की नोडल अधिकारी डॉ. वंदना पांडेय, प्राचार्य शा. महाराजा शिवाजीराव उ.मा.वि. ने । उद्घाटन समारोह में मुख्य रूप से संयुक्त संचालक श्री एस.बी. सिंह, जिला शिक्षा अधिकारी श्रीमती माया मालवीय, संपादक 'वीणा' डॉ. राजेंद्र मिश्र व शोध अधिकारी डॉ. प्रद्युम्न मिश्र सहित इंदौर के अन्य गणमान्य नागरिक व प्राचार्य उपस्थित थे । कार्यक्रम का संचालन प्रशिक्षण प्रभारी सुनीता थत्ते ने किया ।

द्वितीय सत्र से प्रशिक्षकों द्वारा प्रशिक्षणार्थियों को नवीन पाठ्यक्रम की कठिन अवधारणा को सरल व रोचक विधियों द्वारा पढ़ाने का प्रशिक्षण दिया गया । प्रशिक्षकों को रूप में प्राचार्य डॉ. घनश्याम दीक्षित, डॉ. सर्वमंगला शर्मा, जावर सीहोर से डॉ. ओ. पी. दुबे एवं इंदौर से प्रमुख स्त्रोत डॉ. विनायक पांडेय, संस्कृत विभागाध्यक्ष, शा. संस्कृत महाविद्यालय एवं श्रीमती सुनीता थत्ते ने प्रशिक्षण दिया । लगातार छः दिवसों तक चले इस प्रशिक्षण में इसके अतिरिक्त विषय विशेषज्ञ के रूप में डॉ. मीनाक्षी जोशी, डॉ. वंदना नाफड़े एवं डॉ, अर्चना जोशी ने शिक्षकों को प्रशिक्षित किया ।

कार्यशाला संबंधी दिशा निर्देश देते हुए डॉ. कौशल किशोर पांडेय, संयुक्त संचालक लोक शिक्षण, म.प्र., भोपाल ने राज्य के समस्त संस्कृत शिक्षको को संस्कृत भाषा की सेवा समर्पित भाव से करने का संदेश दिया । हिंदी मासिक पत्रिका 'वीणा' के यशस्वी संपादक डॉ. राजेंद्र मिश्र ने प्रशिक्षणार्थियों के समक्ष भारतीय भाषाओं के मूल उत्स संस्कृत भाषा पर प्रकाश डाला । उक्त प्रशिक्षण में पाठ्यक्रम की कठिन अवधारणाओं के साथ राज्य शिक्षा केंद्र एवं माध्यमिक शिक्षा मंडल से प्राप्त माड्यूल पर भी प्रकाश डाला जाकर प्रश्न पत्र निर्माण व परीक्षा की दृष्टि से प्रश्न पत्र हल करने हेतु उचित मार्गदर्शन भी दिया गया ।

प्रशिक्षण में प्रशिक्षणार्थियों द्वारा श्रीमती सुनीता थत्ते के निर्देशन में एक दैनिकोपयोगी वस्तुओं तथा वस्त्र, स्टेशनरी, किराना बर्तन, भोजन, फल-सब्जी-मिठाईयाँ व अन्य दैनिकोपयोगी सामग्री का जीवंत संस्कृत शब्दकोश तैयार कर प्रदर्शनी लगाई गई । आई.पी.एस. एकेडमी की छात्रा कु. भारती पाटीदार के द्वारा संस्कृत की विवध कथाओं पर आधारित संस्कृत चित्रकथा भी प्रदर्शनी का मुख्य आकर्षण रहे ।

कार्यशाला का समापन 13 सितंबर को दोप. 2.30 बजे डॉ. मिथिलाप्रसाद त्रिपाठी, निदेशक, कालिदास अकादमी, उज्जैन की अध्यक्षता में हुआ । सारस्वत अतिथि के रुप में डॉ. प्रभाकर नारायण कवठेकर, पूर्व कुलपति तथा केंद्रीय संस्कृत अध्ययन मंडल के अध्यक्ष एवं डॉ. भागीरथ प्रसाद, कुलपति देवी अहिल्या विश्वविद्यालय, इंदौर एवं डॉ. प्रद्युम्न मिश्र, प्राध्यापक, वैष्णव वाणिज्य महावि., इंदौर एवं डॉ. चद्रकिरण अग्रिहोत्री, प्राचार्य, शास. संस्कृत महावि., इंदौर ।

वैदिक मंगलाचरण एवं सरस्वती पूजन के साथ अतिथियों द्वारा किए गए दीप प्रज्जवलन से कार्यक्रम प्रारंभ हुआ । श्री बसंत सिंह जौहरी ने स्वागत भाषण दिया । संरस्वती वंदना डॉ. अंजना पाठक ने प्रस्सुत की । अतिथियों का शाल श्रीफल से सम्मान किया गया व प्रशिक्षणार्थियों को प्रमाण पत्र वितरित किए गए ।

दीक्षांत समारोह की सांगता सिद्धि की परिपूर्णता वरिष्ठतम आचार्य कुलपति महोदय के उद्बोधन से हुई । समस्त प्रशिक्षणार्थियों के प्रतिवेदन के अनुसार प्रशिक्षण सफल रहा । प्रशिक्षण में प्राप्त नवीन शिक्षण विधियों का समावेश निश्चय ही संस्कृत पाठन में उपादेय होगा । विविध संस्कृत गीतों व शिक्षकों के परस्पर संस्कृत वार्तालाप ने छह दिनों तक कार्यशाला को पूर्णतः संस्कृतमय बनाये रखा ।
सुनीता थत्ते  प्रशिक्षण प्रभारी विनायक पांडेय, शोध मंत्री, संस्कृत शोध केंद्र, श्री म.भा. हि.सा. समिति

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